पुखराज पहनने का सही तरीका जानें कौन पहन सकता है और किसे दूर रहना चाहिए

येलो सफायर यानी पुखराज रत्नशास्त्र में बेहद प्रभावी माना जाता है। यह रत्न गुरु ग्रह की ऊर्जा को मजबूत करता है और जीवन में कई तरह के सकारात्मक बदलाव लाता है। इसे पहनने की विधि और सही राशि की पहचान जरूरी होती है ताकि इसका शुभ परिणाम मिल सके।
पुखराज पहनने का सही तरीका

रत्नशास्त्र में कई ऐसे रत्न बताए गए हैं जो जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं। इन्हीं में एक है पुखराज जिसे यलो सफायर भी कहा जाता है। इसका रंग हल्का पीला और सुनहरा होता है और यह गुरु ग्रह से जुड़ा माना जाता है। पुखराज पहनते समय सही विधि का पालन करना बहुत जरूरी है ताकि इसका प्रभाव शुभ बने। मंत्र जाप के साथ इसे धारण करने से यह और अधिक फलदायी माना जाता है।

पुखराज हमेशा गुरुवार के दिन ही पहनना चाहिए। इसे पहनने से पहले कच्चे दूध में गंगाजल और शहद मिलाकर शुद्ध किया जाता है। इसके बाद ॐ बृं बृहस्पतये नमः या ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए। जब शुद्धीकरण पूर्ण हो जाता है तब इसे दाहिने हाथ की तर्जनी उंगली में पहनना सही माना जाता है। माना जाता है कि इस विधि से गुरु ग्रह की कृपा जल्दी प्राप्त होती है।

कुछ राशियों के लोग पुखराज को बिना डर के पहन सकते हैं। यह रत्न मेष, कर्क, सिंह, धनु, मीन और वृश्चिक राशि के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इन राशियों के लोगों को पुखराज पहनने से आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन में तरक्की के अवसर खुलते हैं। इन जातकों के लिए यह रत्न कई तरह से लाभ देने वाला माना जाता है।

कुछ राशियों के लोगों को पुखराज नहीं पहनना चाहिए। वृषभ, कन्या, तुला, मकर, मिथुन और कुंभ राशि वाले पुखराज धारण न करें। गलत रत्न पहनने से शरीर और जीवन पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए किसी भी रत्न को पहनने से पहले ज्योतिष से सलाह लेना जरूरी होता है। सही मार्गदर्शन मिलने पर रत्न का लाभ कई गुना बढ़ जाता है।

पुखराज पहनने के कई फायदे होते हैं। इसे धारण करने से नौकरी और करियर में ग्रोथ मिलती है। जिनकी शादी नहीं हो रही होती है उन्हें इससे सहायता मिलती है। मानसिक शांति प्राप्त होती है और आर्थिक स्थिति भी धीरे-धीरे मजबूत होने लगती है। अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए यह रत्न बहुत प्रभावी माना जाता है।

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